Sunday, 10 December 2017



पल भर में सिमटा दिया...!
फिर कैद वहीं कर,
कुछ बरस महीने
न अता न पता ..
बस.. थोड़ी ही देर
बस.. इतना ही
पुराने कल से
अब वास्ता रहा ..!!
-शालिनी
25/9/2017
कभी अछूता रहता है मन....
पास से गुज़र जाता है सूरज
सुदूर लालिमा बिखेरता है
और फिर छुप जाता है
अंश भर भी छू नही पाता...
गर्मी नरमी लिए
बगल से निकल जाता है...
अहसास से है सब जग !!!
मन मे उगाने होंगे
चाँद सूरज सितारे..
मोती नयन कोर से,
घुमड़ते बादल,
हृदय से हटाने होंगे...
सामने उसके जलाओ दीपक
अंधेरे मन से हटाने होंगे..!
सृष्टि का भाग हो तुम
संग सूरज एक तुम्हारे चल रहा है
ताप तप तूममें भी भर रहा है
छूकर तुम्हे जीवन दे रहा है
सँवारो विचारो
हर ह्रदय सुवासित हुआ चाहता है ..!!
-शालिनी
13/10/2017