Sunday, 28 August 2011

रेत समुंदर के किनारे  की
 क्या कुछ सहती है,
खींच ले जाती हैं लहरें
अभिन्न सखियों की तरह ,
तो कभी फ़ेंक देती हैंवापस 
एक दुत्कार की तरह,

रौंदते हैं पाँव,
जला देती है धूप,
चांदनी ही है जो ढंडक देती है
ये तो किस्मत ही है
जो हर हाल दिखा देती है!!!!

Tuesday, 23 August 2011


बिखर  चूका  था  अगर  मैं तो  क्यों  समेटा
मेरे  हर  घाव  क्यों तुमने   सिया
क्या  है  नहीं  तेरी  नज़र का   कसूर
जिसने  मुझे ये  हौसला दिया 
दिन गुजरते रहे 
वक़्त जाता रहा
उम्र की सीढ़ी हम चढ़ते गए
लोग मिलते रहे
नए अहसास रोज़   देते गए
डूब गए जिनमे हम कभी 
कभी तैर कर निकल गए
वो भी आए  कुछ लम्हे 
जिनको  न जाने देते हम
पर, बेदर्द, वे भी हाथ छुड़ा के चले गए...!

Thursday, 18 August 2011

क्यों खो  गए   है दिन  रात मेरे

कहा  छुप   गए  हैं   ख्वाब  मेरे

हैं  कहाँ नींद  इन  पलकों  में  मेरे


हूँ  कहाँ मैं   और  तुम  हो  कहाँ


क्यों  मिलते  नहीं  जवाब  इन   सवालो  के  मेरे 
वो  तुम्हारा बुलाना और मेरा कतराना, नज़रें  चुराना  भूला नहीं
तुम्हारा गुनगुनाना और मेरा उबासियाँ लेना
  

वो  इंतज़ार और इज़हार भूला  नहीं...


आज ,...मेरा बुलाना ,तुम्हारा  कतराना


मेरा गुनगुनाना
 .....मेरा    इंतज़ार...  और  इज़हार,  बन  गया     सजा  तो  नहीं????

Monday, 15 August 2011


कोई  हक़  तो  नहीं था  तुम  पर  मेरा

न  तेरे  ज़िक्र   में आया  था नाम  मेरा

तेरी दुनिया थी  अलग  मेरी दुनिया  से

क्यों  मेरी  तनहाइयों  में  था  बस  तेरा  ही  बसेरा


लो  अब  कर  दी  गिरफ्त हमने    ढीली 

अब नहीं  बांधेंगे अश्क  मेरे

न  पकड़ेंगे  अब तुम्हारा दामन
 
कि  राह बदल दी  है तुमने इस मोड़ से कहीं  !


तुमको  याद किया  हर  लम्हा

पर  न  दस्तक  दी  तेरे  दरवाजे  पे ,

गुम  हो  गए  मेरे  आंसू  अपने  ही   शानो  पे,

 तुम   को न हुई  खबर  अपने दीवाने  की .

तुम  एक  आस   थी
एक  अप्राप्य को  पाने  की  आस !
एक  प्यास !
त्रप्ति  थी  तो  बस  तुम्हारे   पास
इस  आस  और  प्यास  की  बलि  हुए  न  जाने  कितने   लोग !

जो थे अडिग , न तोड़ सकी उनको  कुंठा!
अब  तुम  विश्वास  हो
एक  अहसास  हो ,
चेतना   का  आधार  हो
खो  न  जाये  कहीं  ये  विश्वास
न  टूट जाये  फिर  हमारी  आस
एक  जुट  हो  यही   प्रयास
देश   की   अखंडता  और  स्वाधीनता  हो   अक्षुण
रहे  सभी  दिलो  में  देश  प्रेम  का  वास  !

Saturday, 13 August 2011

बहुत  अहसान   किये  है  जिंदगी  तुमने

मौत   से  बचाया  तो  कभी  खूब  हंसाया

अब   एक  अहसान और  कर  दो
 उनकी  यादो  को  मेरे  दिलो  दिमाग  से अगवा  कर  दो

कुछ  तो सुकून आए

ऐसी   कोइ  दवा कर दो
बहते  हुए  दरिया  को  न  बाँधे कोई ...
 पंख  उड़ते  हुए पंछी के   न  काटे कोई...


है   ज़िन्दगी  जिसमे  उसको  न  बांटे  कोई.


बाद  मुद्दत  क  मिलना

पुराने  किस्से  दोहराना

 फिर  उनसे  ही  घबराना ,

कतराना

ज़रा सी बात  पे  रिश्ते  टूट  जाना


यह    दुनिया   ऐसी  है  हमने  अब   जाना


  दोस्त  मुश्किल  से  मिलते  है

इसे  कोई  तो  समझाना....



दोस्त  तो  हो  पर  दूर  ही  रहना,
अपनी   ही  सुनाएँ   पर  तुम  कुछ  न  कहना,
इस  व्यस्ततम  जीवन  मे  अपने   लिए  ही  जीना ,
कही  भूल  से  १ मिनट  भी   न  जाया  करना....
उनके  लिए  जो  एक  आस  लगाये  बैठे हैं   कि  कब  उनकी  नज़र  हो
और  रोशन  हो  जाये  दिल  का  हर  एक  कोना.... . 

एक  उम्र  गुजर  जाती  है  तुम्हे  मनाने  मे ,

और  उम्र  ढहर  जाती  है तुम्हारे  मान जाने  मे...:)

Tuesday, 9 August 2011


कुछ  टूटता  सा  क्यों  है
एक  एहसास    तेरे  दूर  जाने  का क्यों  है


एक  रिश्ता  जो  संजोया  भी  न  था
   उसके   खोने  का  दर्द  क्यों  है