Friday, 30 September 2011

मैं  नहीं  जानती  सच  क्या  है
जो  तुमने  बताया  और  मैंने  सुना
या  जो  दिल  ने  कहा  और  तुमने  न   सुना
या  न  तुमने  कहा  पर  मैंने तो  सुना ....???

Thursday, 22 September 2011

एक  बसेरा  तिनको  का  बनाया
प्रेम  का  ताना  विश्वास  का  बाना  पिरोया
फूल  खुशियों  के  खिले
जिनकी  सुगंध  को  मन  में  बसाया 
वक़्त  ने  जब  बेदम   किया  
वो  बसेरा  न  जाने  कहा  गुम हो  गया 
तिनको  को  ही  बस   पाया  वहां  ,
रिश्तों  का  पता  भी कहीं  खो  गया 
खुशियाँ  खेलती  थी  जिस  आँगन  में  
आज क्यों  वो  वीरान  हो  गया 
मालुम  था  हर  वक़्त  गुज़र  जाता  है 
अब  जाके  जाना  कि  अपना  भी  वक़्त  अब  आ  ही  गया !!!

Monday, 19 September 2011

अब  लौट  जाने  को  जी  चाहता  है
जी   न  सके  जो  पल  वो  जीने  को  दिल  चाहता  है 
काफिलों  से  घिरे 
अनेक  राहों  से  गुजरे

मिले  लोग  कितने  हर राह गुज़र
कुछ  बने  अपने  और  कुछ  अपने  बेगाने  हुए
हादसे   कुछ  खट्टे तो  कुछ  मीठे भी हुए

आज  सब  कुछ  भुलाने  को  जी  चाहता  है
जहाँ  से  चले  वही  लौट  जाने  को  जी  चाहता  है 

Thursday, 15 September 2011

सांकलो में  टिकी  तेरी  जुल्फें  और  दीवार  से  सिमटी  तेरी  तशरीफ़ ,
 बात  कहते  तेरी  पलकों  का  उठना...झुकना
मेरी  दो  बातें  और  तेरी  बेबाक  हंसी
न  हुआ  मिलना  दोबारा  फिर
न   तुझे  देखा  कही  पल  भर
तेरे  वजूद  को  न  झुढ्ला पाया
जो  भी  था  बस  याद  रहा   कि
उफ़   क्या  नज़ारा  था   जिसने  कद्रदान  हमें  बना दिया

आप   मिले  न  मिले ,
आपको  हमने  तो  यादों  में  बसा लिया ....

Wednesday, 14 September 2011

इंसान सांप की मानिंद नज़र आता है 

सांप फिर भी केंचुल तो बदल लेता है 

इंसान न बदल पाता है

केंचुल पे  केंचुल चढ़ा ता जा ता है 

 झूठ  बोलते  बोलते  उसका      अस्तित्व  ही  बदल  जाता   है ..

.सही  गलत  का  फर्क  भी  मिट  जाता  है ..

.गैर  तो  गैर  ही   हैं ..

 खुद  अपना  ही  मन  कहाँ  पढ़  पाता  है ...







































































न   करो  तुम  हमसे  बात

हम  खुद   से  बात  कर  लेंगे

 ,
न  हो  गर  जम  के   बरसात


हम  अपने  आंसुओ  से  जग  डुबो  देंगे ...


Teri is duniya me
ye manjar kyun hai?
Kahin zakhm to
kahin peeth me
khanzar kyun hai?
Suna hai ki tu har
zarre me hai rahta,
To fir zamin par kahi
Maszid Kahi Mandir
kyun hai?
Jab rehne wale is
duniya ke hai tere
hi bande,
To fir koi kisi ka dost,
aur koi dusman kyun hai?
Jab nahi nakaar
saki hai duniya,
tere is wajud ko,
Tere hone se fir
kahin paki fasal,
aur kahin jameen
banzar kyun hai?
Kehte hai ki tu
banata hai

mukaddar,
To fir koi badnasib,
aur koi mukaddar ka sikandar kyun hai .....?


दिल जब  दुखो  से  भर   जायेगा
 ,
आंसू  बन  आंख  से  बह  जायेगा

 ...
क्यों   बताएं  हाल  ए  दिल  ऐ  दुनिया


कि     दवा  न   कोई  कर  पायेगा ..

शालिनी 

Tuesday, 13 September 2011

भगवन फरेबियो को सजा यूँ दे .. कि कभी फरेब जब वो खाए  

तो याद उनकी करे .. जिनको फरेब उसने दिया !..

Monday, 12 September 2011

वो जो बैठे हैं शान से,
तख़्त ओ ताज था नहीं हक में ,
न थे वो लायक शहंशाही के ,
खून में डूबे है वो सर से पाँव तलक ,
रखते हैं जो भरम  बफदारी  का ,
जिनको न सताती हैं चीखें मौत की 
न रुलाते है गम बदनसीबो के
क्या ख़ाक करेंगे करम दुखों को दूर करने के
सिर्फ नशा है जिन्हें अपने नोट और वोट का ...

शालिनी 

Friday, 9 September 2011

तेरी बातें मन को भा गयीं ,
उम्र का क्या करें
जो आ ही गयी,
झूठ ही बोला होगा तुमने
बात ये भी तो समझ में आ गयी,
कुछ तो भरोसा रहा ही होगा दोस्त मेरे 
की तेरे झूठ में भी सच्चाई नज़र आ गयी....
न ले जाएजा मेरे दिल का
 मेरे सफ़ेद बालों से,
बसंत कितने ही बीत गए 
पर महकता है ये 
खिले हुए सुर्ख गुलाबों से,
तू क्यों मुझे उम्र का सिला 
देता है ऐ दोस्त
दिल आज भी बहकता है
तेरे ख्यालों से!!!!

Friday, 2 September 2011

 ख़ामोशी  का  तो  अब  कम  नहीं  दुनिया  में
..इस कोलाहल  में  वो  दिल  ही  कहाँ  जो  उसे   सुन   सके !!