Wednesday, 28 December 2011



क्यों   जुडती  जा  रही  है  जिंदगी  तुमसे 
खयालो  की  हर  राह पहुच  जाती  है  तुम  पे 

Tuesday, 27 December 2011

दो  आँखे  देखती  हैं   शितिज़    के  किनारे  से  
सामने  आते  नहीं , ढूँढती  है  नज़र  उन्हें  हर  नज़ारे  में  ....!


दम  तोड़  देती  हैं  न  जाने  कितनी  बातें  यु  ही 
ज़िक्र  जिनका  न  हुआ  और  दफ्न हो  गयी  दिल  में  ही .. :)


जो  कहते  थे  की  वक़्त  गुज़रता  नहीं  उनके  बिना 
आज  कहते  हैं  की  वक़्त  ही  नहीं  ...

Monday, 26 December 2011

भावना के उद्वेग में जब भी जिया 
हर पल तुमको ही समर्पित किया
प्रार्थना के हेर प्रष्ठ पर तुमको ही नमन किया


अनभिज्ञ थी छवि से तुम्हारी 
हृदय में फिर भी प्रतिष्ठित किया 
वंदना हो मेरी और कृपा हो तुम्हारी 
क्यों न ये अवसर दिया ... ?

Monday, 19 December 2011

तुम्हे  आवाज़  दे  बुला  लू  ये  मुमकिन  नहीं 

तू  आए या  न  आए  मेरे  बस  में  नहीं 

मेरी  हर  बात  तू  मान ले  मेरे  हक़  में  नहीं ....

Monday, 5 December 2011

ना जाने क्यों दिल मजबूर होता है
ज़िक्र तेरा हो और आंसू आंख में होता है


तेरे गम में पागल हु ऐसा भी नहीं
फिर भी तेरे नाम में दर्द का पता होता है


तेरे आँगन से आती जो हवाएं मेरे गुलशन में
ये तो सोच है मेरी ,ऐसा भी कहीं होता है  ...