Thursday, 8 March 2012


जी  चाहता  था   जगाऊ नींद  से  तुम्हे 

बालो  में  उँगलियाँ  फंसा  थाप्थापौं  तुम्हे 

कान में  चुपके  से   आवाज़  दू  तुम्हे 

पर  कुछ  सोच  के  डर जाती  हू

कि कही  हो   सपनो  की  दुनिया  ही न  प्यारी  तुम्हे 

तुम  नींद  से  जागो  और  पा जाओ  हमे 

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