Saturday, 3 March 2012

मै तो  गुज़रा  वक़्त  हू तुम्हारा 


जैसे  गुलदस्ते  का  फूल   हो कोई  पुराना ...



कम  नहीं  हैं  लोग  तुम्हारी  दुनिया  में 



सफ़र  कट  ही  जायेगा  बढ़िया  तुम्हारा ...




तुम  प्यार  से  बोलो  ये  ज़रूरी  तो  नहीं ..



दुआ  में  एक  लफ्ज़  न  निकल  जाये  तुम्हारा ..



तुमको तो  आता  है  शब्दों  का  सलीका  ..



हम  ही  ना  समझ  पाए  इशारा  तुम्हारा  ....

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