Tuesday, 24 July 2012



बुरा है रिश्तो का 
बुलबुलों सा टूट जाना 

मुस्कुराने से पहले
हंसी  का मर जाना 

जिंदा तो हो मगर 
जिंदगी को तरस जाना

बुरा है हर आस से 
निराश हो जाना ...

Monday, 23 July 2012

काट भी लो उम्र सजा ए जुर्म में ..
जुर्म जुर्म ही रहता है कम नहीं होता..
शालिनी
तू जीत लेगा जहाँ की हर शेह 
नाउम्मीदियों को न करीब आने दे 
तेरे साथ हैं और तेरे साथ रहेंगी 
उन दुआओं को रंग लाने दे..
तू है.. 
पर है नहीं ..
जुडी ही नहीं

जब  तुझसे ..
क्यों  टूटी सी लगे ?? 
तेरे लिए .. 
अपने लिए
कुछ पल जिए
कुछ पल मरे,
खुल के हँसे
जी भर रुले,
चलता नहीं 
कुछ बस मगर 
डूबे युही 
उबरे यु ही..,
व्यर्थ सी जिंदगी 
गुजरी यु ही ...

कुछ ज्ञान था 
अज्ञानता में,
कुछ मान था 
अवमानना में,
कुछ जान थी 
निर्जान में,
हो कुछ नहीं 
ऐसा हुआ नहीं, 
तू है मगर 
मिला मुझको नहीं
काश! मिल जाये 
तू है अगर कहीं...
शालिनी

Friday, 13 July 2012

तेरी झोली में कुछ नहीं होगा कम 
कभी किसी (मायूस) के मुस्कुराने का सबब तो बन ..
शालिनी
सौ  कवायतें 
एक  तेरा  साथ ,

निर्द्वंद 
छूटता  है 
हाथ ....

Monday, 9 July 2012

एक कोमल एहसास 
जब पहली बार तुमको छुआ
गुलाबी हथेली को जब चूमा
अपने होंठ कठोर नज़र आये 


कैसा निरीह लगा जीवन
क्यों आयी तुम मेरे आँगन 


दुनिया की तकलीफों से कैसे बचाऊँगी मै
इस आपाधापी में कैसे सम्भालुंगी तुम्हे

तेरी इस कोमलता को कैसे संजोउंगी मैं 
अपनी ही ज़िम्मेदारी न सम्भाल पाई 
कैसे तुमसे न्याय करुँगी मैं 

एक नया एहसास जन्मा है तुम्हारे साथ 
पनपा है एक लता को आधार देने का बोध 
हर सोच अब तुम तक जाने लगी 
तुम में अब मैं नज़र आने लगी 

अपने ख्वाबो को शायद कुछ रूप दे पाऊं 
जो खुद न कर सकी राह उनकी तुम्हे दिखा पाऊं
अपनी तक़दीर की हर ख़ुशी तुमको दे पाऊं 

पर एक जुनून है कि ठहरता नहीं 
तेरी हर मासूम हंसी पर खिलता नहीं 
वक़्त की  मार तुम न देखो सोचती हु यही

एक सशक्त ढाल बन हर प्रहार रोक लू मैं 
तुम  मेरी कल्पना हो ..तुम्हे आकार  तो दे लू मैं.....



ये लिखते समय आंसू क्यों  भर गए आँखों में ...

  

Sunday, 8 July 2012

 एक बूँद ,
अमृत
जीवन का, 
एक सच
अमिट,
एक  धरती,
जीवन भी
मृत्यु भी, 

एक तू,
न रूप 
ना आकार
न जीवन
न मरण,
एक आस ,
एक विश्वास 
लेगा कभी
अपनी शरण..