Monday, 13 August 2012

हर
नयी सुबह 
हैरानियाँ नयी ..
जिंदगी एक 
राज़ कई ...
खुलती नहीं 
एक पहेली 
सी हुई..
दस्तक से न खुलती हैं कोई दीवार अब

इनमे दरवाजे तो बना दो यारो..

Wednesday, 8 August 2012

एक हैं सबके लिए 
नभ के सितारे 
न  मेरे और 
ना तुम्हारे 
द्वेष में कब तक 
जीते रहेंगे ...
 वक़्त कम है
जीने के लिए,
 समेट लो अपने 
हिस्से की खुशियाँ ,
कब तलक लड़ते रहेंगे ...
 
व्यर्थ है हर घडी आंसू बहाना 
अपने हृदय को हँसना सिखाना
अलग से पल न मिल सकेंगे 
आज रोये, न जाने कब हँसेंगे..
विरला ही हुआ सच 
स्वप्न जिसने देखा, 
मिटती नहीं कल्पना से 
कोई भाग्य रेखा ,
नदी के चीर जैसे ,
किनारों को किसने 
मिलते देखा ...
-शालिनी 

Monday, 6 August 2012

tumhe    yakeen nahi meri ibaadaton par..
daaman mera yu khaali na lauta diya hota ..

kuch to jhuka apni sakht ungliyo ko 
khuli hatheliyon me kya samet payega ...

shalini


तुम्हे यकीन रहा न मेरी इबादतों पर 
वरना 
दामन मेरा न  यूँ खाली लौटा दिया होता 

न जकड के रख अपनी उँगलियों को 
खुली हथेलियों में क्या  समेट     पायेगा ..

Sunday, 5 August 2012

अंतहीन व्योम 
अंतहीन मनुहार 
कैसे मनाऊं सजन
सावन बीता जाये ...