Saturday, 29 September 2012

vidhata  ke  hatho rache gaye chakra me fase jeev,
apne hi hatho katla karte hain har ummeed!


Saaman hazaro hain bahlane ke liye 
sukoon dil ko magar aata nahi ...

kaash wo zammen mil jaati kabhi..
ki ham bekhabar so jaate wahi ...


dushmano ne lagaya hisaab jab se dosti ka 
khushgawar lamhe kam hote chale gaye ....


chale jayenge ek din ham bhi..
safar koi bhi ho khatma hua hi karte hain ..


Mere wazood se tumhe vaasta hi kya 
Hazaaron Chahne Wale Tumhare Saath Chalte Hain...

विधाता के हाथों रचे चक्र में फंसे जीव 
अपने ही हाथों कतला करते हैं हर उम्मीद ...

सामान  हजारों हैं बहलाने के लिए 
सुकून दिल को मगर आता नहीं ...

काश वो ज़मीं मिल जाती कभी 
की हम बेखबर सो जाते वही . . 

दुश्मनों ने लगाया है हिसाब जब से दोस्ती का 
खुशगवार लम्हे कम होते चले गए ..

चले जायेंगे एक दिन हम भी 
सफ़र कोई भी हो खत्म हुआ करता है।।।

मेरे वजूद से तुम्हे वास्ता ही क्या 
हजारो चाहने वाले तेरे साथ चलते हैं।।।


Friday, 14 September 2012

एक स्वप्न
तुम दिवस के 
गूढ़ रहस्य 
चिर निंद्रा के 

अखंड तेज़ दिवाकर में 
फिर निस्तेज तिमिर में 

मै नतमस्तक होती हूँ 
मै तुम में हर पल जीती हूँ 
तुम में एक दिन खो जाउंगी 
तुमको पाकर भी न पाऊँगी ... 
भ्रमित सी मै अंत हो जाउंगी ..

कर प्रसार तुम दिव्य ओज 
एक बार तो रूप उजागर करना
मन प्राण मेरे फिर हर लेना। ....

Saturday, 1 September 2012

अपेक्षित है 
संतुलित रहना 
संतुलित करना 
हर यथार्थ को 
हर स्वप्न से ...

अपने कर्म को 
 भावना से ..

और
जरुरी है 
 विस्थापित  कर देना 
अतीत को 
वर्तमान से..
द्वेष को 
इंसान से..
-शालिनी


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