Thursday, 22 November 2012

एक जिंदगी 
और एक तुम ..
जिंदगी तुम्हारी 
रह गए हम ..

लफ्ज़ हज़ारों 
 बात गुम ..
अनकही बातें 
 शोर हरदम ..

बे आवाज़ धड़कने 
आँख नम ..
उन्नीन्दी आँखों का  
एक ख्वाब ..बस तुम 
-शालिनी

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