Tuesday, 25 December 2012

ye kiski awaz jagati hai mujhe
hai kaun meri ankho me basa ..
jis raah me hai tera ghar 
meri raaho se hai juda ..
tum bheed me na kho jaana
meri ankho ने pehra lagaya hai sada .


यह किसकी आवाज़ जगाती है मुझे 

है कौन मेरी आँखों में बसा ..?
जिस राह में है तेरा घर 
मेरी राहो से है जुदा ..
तुम भीड़ में न खो जाना 
  आँखों ने पहरा लगाया है सदा ...

Saturday, 22 December 2012


ek diya tum jalao
ek diya main jalaun
is timir ki kalima ko
aao miljul kar mitayen..
deep ghar ghar me jalen
andhere man ke haten
aao Tyohaar Diwali ka
ham tum manayen...

-sks



मै किस तरह दिलाऊं यकीं नेकपरस्ती का
कि तेरा साबका शरीफों से कभी हुआ ही नहीं..
sks♥






बदलते देखी है हर चीज़ दुनिया में...
अपने हाथो की लकीरों के सिवा ..
-शालिनी







तेरी कोशिशे जाल बुनती हैं..
तू सुलझता कम उलझता ज्यादा है..
sks

Bahot soch samajh kar banayi hain haden (हदें) usne
milta utna hi hai jiska tu kabil hai....
sks♥

बहुत सोच समझ के बनायीं हैं हदें उसने 
उतना ही मिलता है जिसके तू काबिल है ....

मेरी अधखुली आँखों में सपने सजे थे कई 
तू उनमें ही धूल धूल भर गया ...

मेरे चेहरे पे नकाब न था कोई 
तूने अपनी नज़र को ही धुंधला दिया ....

बंद तो कर लेती मैं दर - ओ -ज़हन के रास्ते 
तू ही बेवक्त आँधियों सा गुज़र गया ...
-शालिनी

कितने ही घर ढून्ढ लिए तूने आने जाने के 
क्यों घर एक में भी बसा नहीं पाता ..

उम्र यूँ ही गुज़र जाएगी ज़द्दो ज़हद में 
क्यों कुछ पल अपने लिए जुटा  नहीं पाता ...

भूल जाता है उम्र भर की यादें 
क्यों कोई एक लम्हा भुला नहीं पाता ..

तमाम रंज-ओ-गम छुपाता है अपने सीने में 
तसल्ली तो देता है पर खुद बहल नहीं पाता ..

वही बातें वही किस्से वही ख्वाहिशें 
क्यों कुछ नया लिखा नहीं जाता ...

Thursday, 13 December 2012


मैं कैसे तुमको समझाउं 
मन कितना विचलित होता है 
जब तेरी बातों पर 
अमल नहीं हो पाता है 
तुम कहती हो डरना मत 

पर ..मैं डर जाता हूँ
अँधेरे से घबराता हूँ 
कुछ साये जैसे चलते हैं 
वो मुझसे कुछ कुछ कहते हैं
वो मेरे पीछे आते हैं
मैं तेज़ कदम बढ़ाता हूँ ..
उन सायों से पीछा छूटे जो 
मैं सरपट दौड़ा आता हूँ ..
साँसे कानों में फटती हैं 
तुम कहती हो डरना मत 
लेकिन मैं डर ही जाता हूँ ...

तुम कहती हो रोया नहीं करते 
बहादुर कहलाने वाले को 
दर्द छुपाना आता है ..
वोह आंसू सब सह जाते हैं 
कोई जान नहीं पाता है 
मैं अक्सर कोशिश करता हूँ 
कुछ मुश्किल से चुप हो पाता हूँ 
कोई देख न पाए आंसू 
मैं छुप छुप कर रो लेता हूँ 

मन को कैसे समझाऊं 
रोने का अधिकार भी क्या कोई होता है ?
मिटटी से इस ह्रदय में 
सब जज़्ब कहाँ होता है ?
आंसू जब छलने लगते 
तुम कहती हो .. रोया नहीं करते ...

मैं कैसे निष्ठुर हो जाऊं ?
इस दुनिया की खातिर मैं 
कैसे खुद को खुद से खो जाऊं ?
जीने की इस दुविधा में 
मैं बद से बदतर हो जाऊं ...?
तुम मेरे हित में कहती हो 
मैं हित अनहित के भंवर में 
बिलकुल भ्रमित ना हो जाऊं ....

-sks

Sunday, 2 December 2012

tu rahe zahan me sada sada 
yadi bhool bhi yaun yada kada 
samajh le jara busy hu yahan wahan... 


तू रहे ज़हन में सदा सदा

 यदि भूल भी जाऊ यदा कदा 
समझना ज़रा बिजी हूँ यहाँ वहां 

na sawaal ho kisi jawab par
na kisi jawab pe sawal ho
tu chhod de espe har faisala 
kisi faisale par na bawaal ho (sawal)

tere dam se yu hi gujaar du
ye jo umra hai ek sawaal si ..
maut aye to le jaye zindgi jawab si..








न सवाल हो किसी जवाब पर 
न कोई  जवाब हो किसी सवाल का 
तू छोड़ दे उसी पर  हर फैसला 
उसके फ़ैसले पर न कोई सवाल हो।।

तेरे दम से यु ही गुज़ार दू 
ये जो उम्र है एक सवाल सी ..
ऐ  मौत आ ले जा तू ही 
यह जिंदगी एक जवाब सी।।।
-शालिनी