Saturday, 22 December 2012



मै किस तरह दिलाऊं यकीं नेकपरस्ती का
कि तेरा साबका शरीफों से कभी हुआ ही नहीं..
sks♥






बदलते देखी है हर चीज़ दुनिया में...
अपने हाथो की लकीरों के सिवा ..
-शालिनी







तेरी कोशिशे जाल बुनती हैं..
तू सुलझता कम उलझता ज्यादा है..
sks

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