Saturday, 22 December 2012


मेरी अधखुली आँखों में सपने सजे थे कई 
तू उनमें ही धूल धूल भर गया ...

मेरे चेहरे पे नकाब न था कोई 
तूने अपनी नज़र को ही धुंधला दिया ....

बंद तो कर लेती मैं दर - ओ -ज़हन के रास्ते 
तू ही बेवक्त आँधियों सा गुज़र गया ...
-शालिनी

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