Saturday, 21 December 2013

एक पल
ठहर कर देखो..

भागते हुए 
खुशियों के पीछे 
सहेज लिए दर्द कितने ?

समय के साथ चलते चलते ,
गँवा दिए पल कितने ?


जीने  में इस एक जीवन को 
जीवन कितने जी लिए तुमने ? 



एक पल
संभल कर सोचो..

जोड़-घटा करते करते,
खुद घट गए तुम कितने ?


Sunday, 6 October 2013




किंचित एक प्रलोभन ..
स्नेहसिक्त आलिंगन ,

क्षण भंगुर संयम .. 
आतुर मन,

असीमित बंधन ,
असीमित उच्च्श्रनखल  
द्वंदित अंतर्मन,

बोधित  , अर्चित , विकल,
 निर्बाध पलायन ....

Sunday, 22 September 2013

छन्न से गिरती हैं 
बिखर जाती हैं ...
किरचें, 
चुभ जाती हैं ..

दस्तक देती हैं
आहटें,
बिन कहे , बिन सुने
लौट जाती हैं

बिजली सी
चमकती है ..
उम्मीदें,
आँखों में
कौंध जाती हैं

करवटों में
बदल जाती है ..
जिंदगी,,
सिलवटों में
सिमट जाती है ..

खींच लेती हूँ
कोने से पकड़ कर ..
फिर भी
सरक जाती हैं ..
खुशियाँ,
छन्न से
गिर जाती हैं
बिखर जाती हैं ....





Wednesday, 10 July 2013

Aise bhi hai dost!


एक  उम्र  गुजर  जाती  है  तुम्हे  मनाने  मे ,
और  उम्र  ढहर  जाती  है तुम्हारे  मान जाने  मे...:)








दोस्त  तो  हो  पर  दूर  ही  रहना

 
अपनी   ही  सुनाये  पर  तुम  कुछ  न  कहना


इस  व्यस्ततम  जीवन  मे  अपने   लिए  ही  जीना
 
कही  भूल  से  १ मिनट  भी   न  जाया  करना

उनके  लिए  जो  एक  आस  लगाये  बैठे  कि  कब  उनकी  नज़र  हो 


और  रोशन  हो  जाये  दिल  का  हर  एक  कोना




बाद  मुद्दत  क  मिलना 


पुराने  किस्से  दोहराना


 फिर  उनसे  ही  घबराना ,

कतराना


एक  पासवर्ड पे  रिश्ते  टूट  जाना


fb की   दुनिया   ऐसी  है  हमने  न  जाना

पुराने  लोग , पुराने  दोस्त  मुश्किल  से  मिलते  है


इसे  कोई  तो  समझाना





Friday, 14 June 2013

  अलसाती सुबह 
अलार्म को चोंक के बंद करते 
नींद से जागना 
अब सुहाना न रहा 

 वो कोयल की कूकें 
वो चिड़ियों का चेह्चाहाना 
वो सूरज की सीधी किरणों का
आँखों को बींध जाना 
चुन्धिआय़ी आँखों में 
फिर से सो जाना .. अब नहीं रहा ..

सिमट गए हैं लोग कमरों में 
वो आँगन में चौकी लगाकर 
मिलजुल कर खाना-खिलाना कहाँ रहा ..


 देख बंद डब्बों में सजा खान मेजों पर 
याद आती हैं वो चूल्हे से उतरती 
फूली हुई रोटियाँ ..
माँ के हाथों से गर्म  टुकडो में 
रोटियों का बंट जाना  न रहा ..


 वो पूरी कचौरी , मिठाइयाँ 
गर्मजोशी से मिलना मिलाना न रहा ...
कारों गाड़ियों में दौड़ती दुनिया 
थक के चूर होती आरामदेह जिंदगियां ...
शाम ढले वो पानी की फुहारें,.. 
आँगन में बैठ दास्ताने-दिन
सुन्ना  सुनाना  न रहा ....

दूर कर दिए अपने ऐयर कंडिशनरस ने ..
खुली छतों पर चांदनी बिछाना ,
दादी बाबा के लोरी से किस्से कहानी .
आपसी प्यार दुलार का जमाना कहाँ रहा ..

 मोबाइल्स कंप्यूटरस में कैद होते 
अपने बेगाने ..
पास बैठे लोगो को समझना 
अब कहाँ रहा .....

-शालिनी 

Thursday, 14 February 2013




इन प्यारे बन्धनों में 
अपने कर्मो से 
फ़र्ज़ के हाथो में 
हर सीमा को जाना है 
मन आहत होता है 



बंध के आई हूँ ..
खुशियाँ ही तो फ़ैलाने आई हूँ 
भूल के अपना सबकुछ 
प्यार ही  बाँटती आई हूँ ..

अपने वचनों से 
मिटटी की इस देह से 
समर्पित होती आई हूँ ..

किस्मत की लकीरों में 
आशाओं निराशाओं में 
खुद को सौंपती आई  हूँ।।
 अस्तित्व अपना कब स्वतंत्र माना है ..

मुस्कान कोई जब खोता है ..

खुशियों की अभिलाषा में 
हर कोशिश करती आई हु ..






दिल बुझ सा जाता है ..

आशाओं के जंगल में 
खो सा जाता है ..
दिल गुमसुम   हो  जाता है ..
कुछ बुझ सा जाता है ..


उम्मीदों के बादल में 

कुछ घुट  जाता है ..


दिल घट सा जाता है ..

कुछ  बुझ  जाता है ..


आँखों में कुछ सपने लेकर 

रोज़ युही सो जाता है ..
सपनो में सपने लेकर
भरमा जाता है ..


कुछ  बुझ सा जाता है ..



सौंप दिया जीवन 

जीवन के हाथो में 
आशाओं को रोंप  दिया 
आशाओं में ..
उम्मीदें झुठला जाता है ..


दिल भर आता है 

कुछ बुझ सा जाता है ..










Tuesday, 12 February 2013


रूठ जाएँ शब्द मुझसे

और मैं निःशब्द हो जाऊं ..
यह जग मुझसे 
और 
मैं दुनिया से 
अलग हो जाऊं ....



 पर ..

मैं कैसे विमुख हो जाऊं ..
क्यूँ न ..
शब्दों को जोड़ कर 

भाषा का रुख मोड़ कर 

मैं अपने भीतर ले आऊँ 
पल भर ..
मैं भी विस्तृत हो जाऊं,
और .. 
जग को विस्मित कर जाऊं ....

Thursday, 7 February 2013

मयस्सर थे अरसे से 


रातों के अँधेरे ...


..
महसूस करने दे सूरज की तपिश मुझे



बड़े दिनों बाद उजालों में आई हूँ ..



sks♥
Kuchh to shokh thi adayen teri


yun hi to nahi dil dhadak gaya mera..



sks♥
har baar ...
har baat 
ek ahsaan ,

kaano me 

dil ki baat ,
 mumkin nahi ..



har baar

khak ho jaye 
dard e shola,..



ya..
aankh se 

beh hi jaye 
mumkin nahi..

jism me dil

dil me jaan
har baar 
nikal jaye

mumkin hi nahi...




मंजिलों दुआओं से मिल भी जाओ अब ..

इरादे बदल न जाएँ .. क़ुबूल होते होते ..


  




दहलाता है जो समुंदर साहिल को इस कदर ..

क़दमों में दम तोड़ देगा ,है उसको भी खबर ..

Monday, 14 January 2013

संभाल लेती हूँ हर तीर  फूलो की तरह 


देखना है ..कब तलक निगाह तेज़ है मेरी 



या ..कब तू निशाना चूक जाये ...

Saturday, 12 January 2013


अब गूंजती हैं ख़ामोशी इस तरह 
जवाब जैसे हर सांस दे जाये 
रुख लिया है अपनी राहों का अब 
मंजिलों से कहो ...और दूर अब न जाएँ