Wednesday, 10 July 2013

Aise bhi hai dost!


एक  उम्र  गुजर  जाती  है  तुम्हे  मनाने  मे ,
और  उम्र  ढहर  जाती  है तुम्हारे  मान जाने  मे...:)








दोस्त  तो  हो  पर  दूर  ही  रहना

 
अपनी   ही  सुनाये  पर  तुम  कुछ  न  कहना


इस  व्यस्ततम  जीवन  मे  अपने   लिए  ही  जीना
 
कही  भूल  से  १ मिनट  भी   न  जाया  करना

उनके  लिए  जो  एक  आस  लगाये  बैठे  कि  कब  उनकी  नज़र  हो 


और  रोशन  हो  जाये  दिल  का  हर  एक  कोना




बाद  मुद्दत  क  मिलना 


पुराने  किस्से  दोहराना


 फिर  उनसे  ही  घबराना ,

कतराना


एक  पासवर्ड पे  रिश्ते  टूट  जाना


fb की   दुनिया   ऐसी  है  हमने  न  जाना

पुराने  लोग , पुराने  दोस्त  मुश्किल  से  मिलते  है


इसे  कोई  तो  समझाना





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