Saturday, 21 December 2013

एक पल
ठहर कर देखो..

भागते हुए 
खुशियों के पीछे 
सहेज लिए दर्द कितने ?

समय के साथ चलते चलते ,
गँवा दिए पल कितने ?


जीने  में इस एक जीवन को 
जीवन कितने जी लिए तुमने ? 



एक पल
संभल कर सोचो..

जोड़-घटा करते करते,
खुद घट गए तुम कितने ?


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