Tuesday, 15 April 2014



कदम रुक जाते हैं हेंगर पर लटकी छोटी छोटी फ्रॉक देखकर 
उँगलियाँ मचल जाती हैं दो चोटियां बनाने को 
गहराते वक़्त और ये सँकराते गलियारे 

न यादें, न बातें, और न कारवां 


बस मुसाफिर थके हारे…!!!!
पानी से लिखे अफ़साने 
किसने पढ़े ..किसने जाने ...!!!



तेरे बग़ैर रुकते नहीं दुनिया के काम 
दस्तूर है किसी को तो आना है किसी के बाद … !!



मत पूछो कितना मसरूफ़ है ये दिल 
धड़कने के सिवा इसे कुछ काम और भी हैं… !!!

 

गवारा नहीं मुजस्समों में झांकना मुझको 
कहीं कोई अपना बेआबरू न हो जाये … !!

 

तुझसे रुखसत माँगू मैं एक उम्मीद लेकर 
तुम एक बार तो कह दो कि  दिल अभी भरा नहीं   … !!!

दरख्तों ज़रा अदब से बढ़ो ...
बेतरतीबी ज़ुदा न कर दे 
तुम्हे डालियों से कहीं .... !!!!!
जज़बातों से खेलते हैं ये सियासती लोग 
मोहरे बनाते आयें हैं आपको यह लोग ..

जीत का जश्न मनाएं या हारें यह लोग 
काम आपका ही तमाम कर जायेंगे यह लोग ..

खून के आंसूं पीते हर कौम के लोग 
मुसलसल नफरतें बढ़ाये जातें हैं ये लोग ...

बटवारों के दांव हर पल खेलते हैं 
आपकी सरज़मीं पर..   बिसातें  बिछाये बैठे हैं ये लोग ....

इंसानी वहशतों के शिकार हैं यह लोग
मतलब के बाद देखिएगा ....कहाँ हैं आप और कहाँ यह लोग ...!!!!!
किस ख़लिश ने कर दिया बदरंग पत्तों को .. 

कोई नब्ज़ पेड़ की देखे तो मर्ज़ पहचाने..... !!!