Tuesday, 15 April 2014

पानी से लिखे अफ़साने 
किसने पढ़े ..किसने जाने ...!!!



तेरे बग़ैर रुकते नहीं दुनिया के काम 
दस्तूर है किसी को तो आना है किसी के बाद … !!



मत पूछो कितना मसरूफ़ है ये दिल 
धड़कने के सिवा इसे कुछ काम और भी हैं… !!!

 

गवारा नहीं मुजस्समों में झांकना मुझको 
कहीं कोई अपना बेआबरू न हो जाये … !!

 

तुझसे रुखसत माँगू मैं एक उम्मीद लेकर 
तुम एक बार तो कह दो कि  दिल अभी भरा नहीं   … !!!

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