Thursday, 22 May 2014

रोज़ नए चेहरे बदलते हो नए लोगो के लिए ..
एक रोज़ हर चेहरा बेनकाब हो जाता है ....
अपनी आँखों में गौर से झांको एक बार ..
अपना चेहरा भी कभी नज़र आता है ... ????
-शालिनी


अक्सर तुम्हारा अहसास किया है मैंने 
न होते हुए भी होने को जिया है मैंने 
तेरी बातें जब रुला जातीं 
कभी जी लिया कभी मर लिया मैंने 
नफरतों को पाला नहीं 
जो हुआ अच्छा हुआ कह 
सब सह  लिया मैंने। … 
उम्र की इस देहलीज़ पर 
पाकर अब कुछ खो न  दूँ 
किस्मत से भी लड़ लिया मैंने  … 
तुम समझो न समझो 
अपनों को अपना समझा मैंने। . 
अपनी समझ से जब समझा 
नासमझ कह दिया तुमने। …… 


बस एक हवा का झोंका था 
रेत  में दबे ख्वाब फिर उधड़ आये  .... 

हसरतें पलट आती हैं पन्ने  माज़ी के 
वो क्या जानें  पलट कर वक़्त फिर आता नहीं  .... 




कानों में गुनगुनाती हैं सदायें तेरी 
हवाओं  ने जब भी मुझे आ कर छेड़ा है। … 
बेआवाज़ कदमों से धीरे से 
सपनों की दुनिया में 
आते देखा है तुमको . . 

आँखें मूंदे सपनों में 
सपने बुनती जाती हूँ  . . 

तेरे आने और जाने में 
सदियों सा जी लेती हु … 

वो गर्म हथेली हाथो में 
बोसा-ए -गर्मी गालों पर … 

साँसों में साँसों की रुनझुन 
उलझे उलझे से हम तुम…

सपनो में सपने बुनती हूँ 
तुमको चुनती रहती हूँ  … 
और बस सोचा करती हूँ 

क्या तुम भी सपने बुनते हो 
सपनों में मुझको चुनते हो  …? 

Friday, 9 May 2014

क्यों बांधता बन्धनों में 
अपना आज और कल ?
विलुप्त हो जाती हर चीज़ .. 
चल या अचल !!
मुक्त उसने भी तो रक्खा ..
मंद समीर हो या नीर विकल.. !!!
-शालिनी

अच्छा हुआ जो किस्मतें हमारी 
उसने अलग अलग लिख दीं 
कभी मेरी अच्छी 
तो कभी तेरी अच्छी … !!

तेरी अच्छी तो तू मुझे संभाल,
और मेरी पर तू मुझे खंगाल
यह देख अल्लाह का कमाल
किसी को नहीं किया कंगाल
तू भी मैं भी , दोनों मालामाल !!
अच्छा हुआ जो किस्मतें हमारी
उसने अलग अलग लिख दीं .......
 

Saturday, 3 May 2014

पथिक !!
धीरज रख..
तू ही कर्म है 
तू ही है प्राण...

वेग उद्वेग 
एक समान....
गति की 
सीमा नही 
असीमित हर उड़ान...

तृष्णा सुधा
जीवन पर्याय ...
ध्यान भाव
मन का आधार...
निर्विकल निर्बाध चल

ठहरे कहाँ....
पीड़ा हो या सुख गहन
समय आबद्ध है
जीवन का हर पल....
पथिक तू
बस चला चल ...!!!!
-शालिनी
दो तसल्ली.. झूठी ही सही 
क्या पता दिल बहल जाये ..!!

मैं चंद साँसों का बाशिंदा 
आखिरी.. तेरे दर पर 
निकल जाये...!!

तेज़ बहुत धूप है तेरे जहान में 
कहीं कोई तारा न झुलस जाये .. !!

लावारिस से ख़याल थे
बेवज़ह चले आये.... !!
लाख़ कवायतें 
ढर्रा वही ..


सुकून की नींद 
पर चैन नहीं ..


आँखों से उतर कर ख़्वाब 
रास्तों में मिलते नहीं..