Thursday, 22 May 2014

बेआवाज़ कदमों से धीरे से 
सपनों की दुनिया में 
आते देखा है तुमको . . 

आँखें मूंदे सपनों में 
सपने बुनती जाती हूँ  . . 

तेरे आने और जाने में 
सदियों सा जी लेती हु … 

वो गर्म हथेली हाथो में 
बोसा-ए -गर्मी गालों पर … 

साँसों में साँसों की रुनझुन 
उलझे उलझे से हम तुम…

सपनो में सपने बुनती हूँ 
तुमको चुनती रहती हूँ  … 
और बस सोचा करती हूँ 

क्या तुम भी सपने बुनते हो 
सपनों में मुझको चुनते हो  …? 

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