Saturday, 3 May 2014

दो तसल्ली.. झूठी ही सही 
क्या पता दिल बहल जाये ..!!

मैं चंद साँसों का बाशिंदा 
आखिरी.. तेरे दर पर 
निकल जाये...!!

तेज़ बहुत धूप है तेरे जहान में 
कहीं कोई तारा न झुलस जाये .. !!

लावारिस से ख़याल थे
बेवज़ह चले आये.... !!

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