Tuesday, 8 July 2014

Do kadam ka hi to faasla hai
Ek kadam tera
Aur ek mera.... 
Sks
Mere jaise tum ho hi nahi sakte. .
Teri bhookh pyaas alag hai mujhse. ...!!!!
Sks♡
Nahi kar sakte agar saleeke se dosti
To saleeke se dushmani nibha lo ... 

Hazaro virtualies ka dam bharne walo
Ghar me koi ek rishta to sambhalo .... 
Sks♡
रूबरू हो जाओ शायद मुझसे 
जाओ ..ज़रा ढून्ढ लो पहले खुद को...
-शालिनी
करो ना अब फ़ैसला.. 
मैं बुरी या भाग्य बुरा... 
मैं वारूं जग सारा 
या जग ने मुझपे वार किया....
धरती तेरी ..अंबर तेरा, 
तेरी रातें.. दिन है तेरा
मैने कब इन्कार किया......
दैहिक भौतिक इस काया का 
मैने बरबस उपहार लिया...
इन संस्कृतियों को जीने में
मैने क्या उपकार किया...
तेरे बंधन ..मेरे संयम
तेरे मर्म ..मेरे कर्म
मैने कब अपवाद किया ..
करो ना अब फ़ैसला
मैं बुरी या भाग्य बुरा ??
-शालिनी
गम सहो और मुस्कुराओ ,
जियो या मर जाओ ,
दिल की बात.. 
- न बताओ 
- न सुनाओ 
- न दिखाओ .. 
sks♥
देखती हूँ अक्सर ..
पत्तियों की कोर पर 
झिलमिलाती 
चांदी सी बूँदे ...
बिना सहारे झूलतीं 
अब गिरीं तब गिरीं ...
हलकी सी हवा ,
पत्ती का कम्पन
सहमाता तो होगा
उसका अंतर्मन ....
खुद अपना बोझ लिए
और कुछ पल और
फिर तो गिरना ही है ...
यह अवलम्बन
यात्रा का हिस्सा भर ...
आसमान से धरती तक
बहते हुए
ज़ज़्ब होने तक ,
अपने जीवन से
जीवन तक !!!!!
-शालिनी