Tuesday, 8 July 2014

करो ना अब फ़ैसला.. 
मैं बुरी या भाग्य बुरा... 
मैं वारूं जग सारा 
या जग ने मुझपे वार किया....
धरती तेरी ..अंबर तेरा, 
तेरी रातें.. दिन है तेरा
मैने कब इन्कार किया......
दैहिक भौतिक इस काया का 
मैने बरबस उपहार लिया...
इन संस्कृतियों को जीने में
मैने क्या उपकार किया...
तेरे बंधन ..मेरे संयम
तेरे मर्म ..मेरे कर्म
मैने कब अपवाद किया ..
करो ना अब फ़ैसला
मैं बुरी या भाग्य बुरा ??
-शालिनी

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