Thursday, 15 January 2015

कर्म प्रतिबिंबित हों ..!
अस्तित्व नश्वर है ..!
सत्य शाश्वत है ..!
विस्मृति ( भूलना) निश्चित ...
यह 
याद है मुझे ..!!
-शालिनी

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