Thursday, 15 January 2015

कोई गुल्लक तो दी नहीं उसने 
कुछ जमा नहीं कर पायी ...
ज़ेब खर्च मिलता है 
एक पूरा दिन 
और एक पूरी रात ..!
सहेजूँ दिन
या संजोऊँ रात
कुछ बचता नहीं ..
फिर एक पूरा दिन
और एक पूरी रात
और
फिर वही खाली हाथ ..!
-शालिनी

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