Thursday, 15 January 2015

मैं दरख्तों की फुनगियों को देखती हूँ
ज़रा सी हवा भी ज़ोर से हिला जाती है..!
उम्र से सधी शाखों को हिलाने में
हवा भी कुछ दम लगाती है ... !
सिहरना, सिमटना, घबराना क्यों
ज़िंदगी समय से सब सिखाती है .. !!
-शालिनी

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