Thursday, 15 January 2015

मुझे जमाखोरी की  आदत है ...!!
कुसूर मेरा नहीं है ...
पेन्सिल के छिलके ,
कार्डस की गड्डी ,
सुनहरे कागज़ों की कतरन ,
मम्मी के हाथ के बने स्वेटर ,
अम्मा की रज़ाई ,
प्रिया का छोटा सा मोज़ा ,
छोटी छोटी फ्राकें,
कुछ नहीं फेंका जाता .... !
सब यादें, बातें ,मुलाकातें
वो हंसी ख़ुशी और
खोखली बातें,
सब जमा हैं मेरे
खाते में .... !
मालूम है उम्र है सबकी
सरक जायेंगे कहीं
किसी न किसी दिन
फिर भी हिफाज़त से रखती हूँ
कुसूर मेरा नहीं है

यह मेरी राशि और 
जन्म की तारीख ही ऐसी है. !!
-शालिनी

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