Thursday, 15 January 2015

फिर कोरा कोरा सा
चला आया नया साल... !!
बीते पल छिन
कभी पल में गुजरते
कभी पहाड़ से दिन..
सब
समेट ले गया
गुजरता हुआ साल ..!
खट्टी मीठी बातें
मुलाकातें
मुस्कुराते गुनगुनाते ..
और कभी रुलाते
लो
चला गया एक और साल ..!
पुलिंदा भर यादें
भूली बिसरी
सबक सिखाती
कुछ बातें ,
सहेज लिया मैंने
एक ये भी साल... !
अब..
फिर हर दिन अपना है
हम तुम को मिल कर
एक स्वर्ग सा रचना है ,
तेरा - मेरा,
उंच नीच
से उठकर
कुंठाओं से उबरना है .. !
इस भौतिक दुनिया में
मानवता से जीना है
नए दिनों में
कुछ
नया सृजन करना है ..!!
-शालिनी

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