Saturday, 27 June 2015

अपने किरदार पर मैं क्यों शक करूँ 

क्या करूँ जो ये जहाँ मुकम्मल नहीं..... !!!


sks♥


साझे पलों को साझा करता
तुम्हारे पास ,तुम्हारे साथ
साझे रास्तों पर साथ चलता
आश्वस्त और आनंदित होता....!
तुम्हारे पैरों के निशानों पर
अपने कदम रखता
तुम्हारा अहसास समेटता...
कुछ दूरी पर चलते हुए
तुम्हें देखता और
बस देखता रहता...
मंत्रमुग्ध, सम्मोहित सा.…!
तुम्हें सुनता और बस सुनता
जीवन कानों में जैसे बहता
एक लम्हे से लम्हों में
एक जीवन अमर हो जाता ... !
एक कल्पना है सोच के इर्द गिर्द
इस संसार में.. अपनी दुनिया में
हर पल तुमसे साझा करता... !!
--शालिनी


18/5/2015

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