Saturday, 27 June 2015

मायूसियों की कुछ दास्ताँ है ये
जब मुस्कुराने को थे ..बस ,रो दिए ...
ताउम्र सफ़र करते रहे
मंज़िल सामने आई जब
रास्ते बदल लिए ....
बाग़ सजाया किया करते रहे हर मौसम
फूल खिलने को जब हुए ..नोंच कर चल दिए
सब्र से करते रहे इंतज़ार सही वक़्त का
वक़्त आया तो बेसब्र चल दिए ...
सुकून तुमको किसी दौर नहीं
पैमाने ख़ुशी के ज़रा बदल दीजिये...
-शालिनी
26/4/2015

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