Saturday, 27 June 2015

फेस बुक पर memory रिफ्रेश होने लगी है आजकल.......

ये कौन जीता गया मेरे अंदर
मैं कौन हूँ ..झांकती हूँ मैं मेरे भीतर
ये लिखता है कौन ..मेरी कलम से
मैं खुद पहचान नहीं पाती हूँ ...!
कल जो बीता ..बीत गया
पढ़ के फिर दोहरा नहीं पाती हूँ..!!
तुम ले आते हो रोज़ फिर वही पन्ने
मैं पलट के जिन्हें भूल जाती हूँ....!!
-शालिनी

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