Tuesday, 15 September 2015

१३/०९/२०१५ 
सांस सांस अहसास तेरा,
रोम रोम महकती है
नरम छुअन तेरी ,
शोख़ आँखों के राज़ तेरे 
दिल में हूबहू मैंने बसा लिए,
तेरे होठों के प्रेम शब्द
होठों पे अपने सजा लिए,
जिस्म तो है बस एक पैरहन
मैं रूह रूह तुमसे मिला करूँ ..
खोकर तेरे अहसास -ए -वज़ूद में
बार बार खुद को तलाश करूँ ।
-शालिनी

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