Tuesday, 15 September 2015

२३/८/२०१५ 
खुद बनाये, खुद बिगाड़े 
खुद बंधे, खुद बिखर गए 
खुद ही सोचा ,खुद ही समझे 
कुछ अपनी अटकलें,
कुछ अपने दायरे 
जो खुद ही चले जिंदगी
न तुम हमारे
न हम तुम्हारे.....??
-शालिनी

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