Tuesday, 15 September 2015

२१/०८/२०१५ 
न सौदा हूँ ,
न व्यापार …! 
बिकती नहीं 
न कोई खरीदार ..!
एक ज़िंदगी भर हूँ 
नदी की तरह
अविरल, अथक
बहती हुई
तुम्हारी(गंतव्य) ओर .... !!!
-शालिनी

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