Tuesday, 15 September 2015

८/८/२०१५ 
शिकायतें करने लगा है ये मन
अपना होने लगा है शायद ...कोई ..!!
ठिठकने लगते हैं कदम राहों में
करीब से अपना गुजरता है शायद.. कोई ...!!

अभी आवाज़ सी आती है कानों में
नामों से बुलाने लगा है शायद ...कोई ...!!
-शालिनी

No comments:

Post a Comment