Friday, 11 March 2016

मांगता है मौत जब जब ऊब कर 
ज़िंदगी कहती है अभी वक़्त है .और चल..!
sks♥

19.2.1016
फासले कितने भी हों
सिरों पर ज़िंदगी रहे ..!
अहसास हैं तो हम हैं
वरना सिर्फ नाम ही रहे..!
हर सफ़े पर देखना चाहा
हम हाशिये पर भी न रहे
नाम लो, पुकार लो अभी
जाने कल सांस रहे न रहे...!!
-शालिनी
27.2.2016
नींद उठती है चौंक चौक कर 
ख्वाब सहम सहम जाते हैं ..!
फासले पर कब तक रहें 
बगल में नींद के सो जाते हैं ..!
नींद को सुला कर आँखों में 
ख्वाब धीरे से, फिर सरक आते हैं..!!
-शालिनी

1.3.2016
स्मृति विसर्जित हो देह संग
स्वप्न भंग हों स्वप्न संग
काल अंत हो अंत में
अविरल हो या क्षणिक संग... !!
-शालिनी
"die with memories ,
live with dreams "
3.3.2016
यहां...
नया कुछ भी नहीं होता..
कहीं जगह बदल जाती है,
कहीं नाम बदल जाते हैं .... !
कहीं तज़ुर्बे सोचने लगते हैं, 
कहीं दिमाग दिल हो जाते हैं ..!
कहीं यथार्थ चुप लगाता है,
कहीं झूठ हूकता रहता है... !
सोचती हूँ..
क्यों शोर करता है इतना ?
कुछ बदले न बदले
हालात बदल जाते हैं
और
जीते जी
मरने वाले कम ही
याद रह जाते हैं ...!!!
-शालिनी
4.3.2016
आज फिर देखा था उन दिनों को 
पास से गुजर गए...पास आये नहीं ...!
sks♥

4.3.2016
वक्त से परे
न दिन है
न रैन है ...!!
शब्दों से परे ..
बस मौन है..!
व्यथा से परे..
सिर्फ मौत है..!!!
--शालिनी
4.3.2016
कल की शिनाख्त पर आज रख दिया
कल की बात ... अब कल करेंगे ....!!
sks♥
"Don't let yesterday use up too much of today."
5.3.2016
महिला दिवस पर...
इक्कीसवीं सदी में जी रही हूँ
पहचानती खुद को नहीं हूँ मैं,
नित नए आवरण समेटे 
अस्तित्व निज बुन रही हूँ मैं,
आईने में झांकती हूँ
दुर्गा नही , सरस्वती भी दिखती नहीं मैं,
सजी धजी अप्सरा भी लगती नहीं मैं ,
घर को समेटे ह्रदय में एक धुरी पर घूमती
धर्म से बंधी, कर्म को जी रही हूँ मैं ,
आशा अभिलाषा कामना शुधा सब सूक्ष्म हैं
मेरे अंश अंश के लिए जी रही हूँ मैं ,
मैं जानती हूँ मानती हूँ उस जग को
नाप लूंगी कुछ कदम में इस जहाँ को ..
लेकिन घर से आगे नहीं स्वर्ग कोई
सत्य यही जानती हूँ इसी सत्य को जी रही हूँ..
क्या हुआ अगर इक्कीसवीं सदी में जी रही हूँ मैं.....!!!
-शालिनी
9/3/2016
एक बोसा -ए -पेशानी देदो अगर 
ख्वाबों को मैं अभी अलविदा कह दूँ....!!
sks♥

11/3/2016


डर अंधेरों का सताने लगता है 
वज़ूद से लम्बी हो जाती हैं जब परछाईयां...!!
sks♥

9/3/2016

अंधेरों से मन घबरा न जाये
सितारों से दोस्ती कर ली हमने ..!
चलो अब कुछ बात कर ली जाये
ख्यालों से समझौता कर लिया हमने...!!
sks♥
9/3/2016
निश्चित है मौसमों का आना जाना ...!
पत्तियों का कभी गिरना कभी संवर जाना ,
विकल पत्तों का धरा पर लोट लोट जाना,
तितलियों का हर फूल को कह कर जाना...
उम्र अपनी देती हूँ तुम जरा और मुस्कुराना ...!
हर कोई चाहता नही एक मौसम कभी बदलना
अपने अंदर कोई कोना सदा बसंती रखना,
मुस्कुराना किसीका और लगे जग सलोना ,
तितलियाँ मन में सजा कर खुद फूल फूल हो जाना ...!!!
-शालिनी 
11/3/2016
heart emoticon