Friday, 11 March 2016

यहां...
नया कुछ भी नहीं होता..
कहीं जगह बदल जाती है,
कहीं नाम बदल जाते हैं .... !
कहीं तज़ुर्बे सोचने लगते हैं, 
कहीं दिमाग दिल हो जाते हैं ..!
कहीं यथार्थ चुप लगाता है,
कहीं झूठ हूकता रहता है... !
सोचती हूँ..
क्यों शोर करता है इतना ?
कुछ बदले न बदले
हालात बदल जाते हैं
और
जीते जी
मरने वाले कम ही
याद रह जाते हैं ...!!!
-शालिनी
4.3.2016

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