Monday, 25 April 2016

बड़ी बुरी आदत है
बातें अक्सर भूल जाती हूँ

बहुत से किस्से
बहुत सी बातें

कल से पहले
क्या हुआ था
याद करने बैठूं भी तो
भूल जाती हूँ

जैसे हवा सामने से गुजरी हो
हलके से मुझे छूआ हो..
कहाँ याद रहता है
लहराना आँचल का,
बिखरना बालों का ,
आसमान पर बिखरे रंग,
चिड़ियों का चहचहाना,
फूलों का खिलना
और मुरझा जाना ..
लगता है कि
सब भूल जाती हूँ....!

पर नहीं...
एक अंतकूप है भीतर
संवेदनाओं से भरपूर
मैं डुबकी लगा आती हूँ
कुछ बेमतलब के किस्से
उठा लती हूँ ...
अहसास कुछ समेट कर
कुछ यादों को
फिर से दोहराती हूँ...

और...
 एक तत्व लौह है
देह प्राण में ..
निष्प्राण
चुम्बक है तुम्हारे भीतर ..!
मैं याद बहुत करती हूँ
लेकिन फिर भूल जाती हूँ
या

प्रक्रिया कुछ भूलने की
और कुछ भूल नही पाती  हूँ
-शालिनी
25.4.2016
तुम 
ताक पर बिसरे असबाब हो जाना
धूल में लिपटे बदरंग हो जाना ..
साल कुछ और बीत जाएं जब
बाकी के दिन घूरे पर बिताना ...!
sks<3
17.4.2016
गिरवी पड़े हैं ...
शब्द भाव कल्पना और स्वप्न.... !
मधुर मुस्कान और स्नेह से
छुड़ा लाना ..तुम ....!!!!
sks<3
21.4.2016
लंबा सफ़र 
सामान कम,
ज़िन्दगी ..बहुत 
जिएंगे हम...!!!
sks💝
25.4.2016
सफ़र में फिर सफ़र पर चल पड़े हैं
साथ अपने अब खुद चल दिए हैं ..!

तुम तो किनारा कर लेते हो किनारों पर
देखो !......... वहां कितने मेले लगे हैं..!

अजनबी चेहरे अनजान लोग देखती हूँ
कोई तुम जैसा  मिलता नहीं है .....!

रास्ते तुम तक भी जाते हैं लेकिन
हम रास्ते अपने अब चल दिए हैं...!

तय मंज़िलें तय हैं रास्ते , अपने में गुम
लोग कितने थके से लगे हैं...!

सफ़र में फिर सफ़र पर चल दिए हैं...
-शालिनी
25.4.2016