Monday, 25 April 2016

सफ़र में फिर सफ़र पर चल पड़े हैं
साथ अपने अब खुद चल दिए हैं ..!

तुम तो किनारा कर लेते हो किनारों पर
देखो !......... वहां कितने मेले लगे हैं..!

अजनबी चेहरे अनजान लोग देखती हूँ
कोई तुम जैसा  मिलता नहीं है .....!

रास्ते तुम तक भी जाते हैं लेकिन
हम रास्ते अपने अब चल दिए हैं...!

तय मंज़िलें तय हैं रास्ते , अपने में गुम
लोग कितने थके से लगे हैं...!

सफ़र में फिर सफ़र पर चल दिए हैं...
-शालिनी
25.4.2016

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