Wednesday, 24 August 2016

चैतन्य ..हवा के सामने
खड़ी हूँ मैं..
तुम गिरा सकते नहीं 
 धरा को जकड़े हुए हूँ मैं..
आत्मसात है ,मेरा भाग है 
कष्ट से जर्जर अभी नही हूँ मैं...!

काट कर फेंक दो.
या जला दो मुझे ,
आस है ..विश्वास है 
मौत से डरी नही हूँ मैं ..!
-शालिनी
27.6.2016

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