Wednesday, 24 August 2016

तरसता है चमन दौर-ए-बहार को कब से 
तुम  आजाना बूंदे बारिशों की लेकर ..!!

बाकी है गुफ़्तगू -ए -ज़िन्दगी कब से
तुम आजाना पूरी ज़िन्दगी लेकर ..!!
sks<3

22.6.2016

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