Wednesday, 24 August 2016

दौर ए गर्त में जा पड़ी है दुनिया
गलतियां किसकी, गुनाह क्यों बिक गया..?

बरसती रहती हैं बारिशें समुन्दर पर
खुश्क धरती से क्यों दूर मेह कर दिया..?

अश्क भर आँखें पुकारा करती हैं ऊम्र भर
ओझल एक दिन आँखों से क्यों  कर दिया..?

खुदा के हाथ किसने ये कलम दे दिया
बनायीं किस्मतें और फ़ैसला लिख दिया ..!!!
-शालिनी
31.7.2016

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