Wednesday, 24 August 2016

ख़रीद फ़रोख़्त -यह दुनियादारी
बमुश्किल चुकाऊँ पाई पाई सारी..!
सस्ता बेच महँगा पाऊं ,
केहि विधि मैं नफा कमाऊं..!
दुइ आत चौगुन जात
बैठे बैठे कुछ कुछ लुटाउँ..!
पीड़ा मन की मन से हारी
मन में रक्खूं मन की सारी..!
सफल हुई न जो दुनियादारी
कोई न किसीकी न कोई प्यारी..!
ख़रीद फरोख्त की यह दुनिया सारी...!!!
-शालिनी
30.7.2016

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