Saturday, 8 October 2016

अलसाया 
रक्तिम
धीरे से अपनी यात्रा
शुरु करते हुए
मेरे साथ ..!

सड़क के उस छोर पर
आगे आगे भागता हुआ
सिन्दूरी आभा टपकाता
ओजस्वी क्षण क्षण 
जग आलोकित करता 
सुदूर क्षितिज में
मेरा पथप्रदर्शक...!
हमारी
यात्रा अनवरत 
निर्विघ्न सतत चलती रहे

अनंत धरती  आकाश 
संग संग  चलती रहे..!!
-शालिनी
नाम सिर्फ बुलाने भर को हैं 
हमें नाम मिल जाता है 
नाम में हम नही मिलते 
सार्थक को सार्थक नही करते
विश्वास पर विश्वास नही करते
आनंद आनंद में नही
शांति को शांति नही
ज़िन्दगी गुज़र जाती है 
और कहते हैं जिंदगी जी नही 
मिलती है तो दूर भागते हैं 
वरना पीछे भागते हैं 
जो है उसे सँभालते नही 
जो नही है उसे भूलते नही
औचित्य को किनारे रख 
बेसिरपैर से चिंतित 
मानव ...चेतना से परे
तू कुछ भी नही ....!!!
-शालिनी

Friday, 7 October 2016

आँखें खुली पर खोये से लोग गुजरते जाते हैं
अनदेखी  ज़िन्दगी रुकी रहती है किनारों पर ..

कोई देखता ही नही.. न इधर ..न उधर ... !!
-शालिनी
बड़े हुनरमंद होते  हैं झूठे लोग ...
इलज़ाम भर से मर जाते हैं कुछ लोग...!!

सच की तह तक कौन जाता है
सच्चाई से बचते हैं ये झूठे लोग....!!

और कितना गिरोगे कितना गिराओगे
किसी उसूल पे नही चलते  ये झूठे लोग...!!!
-शालिनी
रास्ते जो दूर ले जाएं ..वापस भी ले आएं 
हर सफ़र से पहले एक डर ज़हन में रहता है...!!
sks💝