Saturday, 8 October 2016

अलसाया 
रक्तिम
धीरे से अपनी यात्रा
शुरु करते हुए
मेरे साथ ..!

सड़क के उस छोर पर
आगे आगे भागता हुआ
सिन्दूरी आभा टपकाता
ओजस्वी क्षण क्षण 
जग आलोकित करता 
सुदूर क्षितिज में
मेरा पथप्रदर्शक...!
हमारी
यात्रा अनवरत 
निर्विघ्न सतत चलती रहे

अनंत धरती  आकाश 
संग संग  चलती रहे..!!
-शालिनी

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