Monday, 27 March 2017

एक संवाद चलता रहता है
हर मन के भीतर ...
मौन जिसको कहते हैं
बहुत कोलाहल में होता है अक्सर...
अवचेतन सचेत रहता है 
सुप्त बीज सा अंदर...
–--------------––-------
जाने क्या क्या कहती हूं,
जाने क्या क्या सुनती हूँ,
एहतियातन 
छोड़ परे झूठ मूठ की बातें...
..सच से वाकिफ़ रखती हूं,
सच पूछो तो दुनिया भर में 
सबसे ज़्यादा 
मैं खुद से बातें करती हूँ ...!!!
-शालिनी
17.1.2017
On my way to airport ...

स्याह सुनसान साँप सी बलखाती काली सड़कें..

न कोई तारा न चाँद न आवाज़ कोई,
सोये सोये रास्तों को न दिखाता  राह कोई ...!!
sks💝
18.1.2017
Eyes rested upon
So did our hopes
Fingers tightened on the rope
So do our duties to be
Pull that Strong 
So as to come along 
And
The Tricolour unfurled 
With joy ...in horizon 
Showering flowers n petals 
As the blessings
 through the freedom 
And the care for the Nation !!!!
-shalini
#Hosting flag
26.1.2017
शिकायतों से अब पल्ला झाड़ लेते हैं

याद करते है तो बस दुआ दे देते हैं ..!!
sks💝
फूल मिठाई वादे इश्क़
भरे पेट की बातें हैं...

एक रोटी -डे भी मना लो
बहुत लोग भूख के मारे है...!!!

कितना मुश्किल है यहां इंसान का इंसान होना
ईनसनियत -डे मनाने अभी बाकी हैं....!!!
-शालिनी
13.2.2017
जब झूठ में सिमट जाते हैं कई सच
झूठ लगने लगते हैं फिर हज़ारों सच ...!!
पाखंड करो ढोंग कर लो लाख तुम 
एक रोज़ सामने आ जाते हैं तुम्हारे सच..!!

तुम क्या जानो कैसे कैसे नज़र चुराते हैं
वो झूठ, जो तुम सरेआम छोड़ आते हो ...!!!
sks💝
एक यक़ीन है
शऊर-ए-पुख़्ता ..

ज़मीन सच की छोड़ी तो
देखिये कैसा फिसल गये..!

बड़ा शफा हासिल है
नुक़्स दर नुक़्स निकालने का
इंसान एक रोज़ 
अच्छा क्या देख लिया
देखिये कैसा जल गए..!!

अपने अपने हक़ की
है तरज़ीह बहुत सबको
 मांग लिया जब अपना
ताज़्ज़ुब न करिये
 कि कैसा बदल  गए
-शालिनी
2.3.2017

यह जो तुम थोड़ा सा प्रिय हो न..
वही अप्रिय है मुझमें ...!! 😎😎
©®sks💝
ये जो secrets होते हैं न ...
सब तुम्हारे मन का चोर हैं...!!
@sks

😎😎
7.3.2017
[27/03, 10:36 a.m.] 

 ये जो 'तुम' हो न ...!!
किसी की स्याही का रंग 
किसी के शब्दों की आत्मा 
किसी के दर्द की गहरायी 
किसी का इंतज़ार 
तो किसी का  ख्वाब ...!

ये 'तुम' ही हो न...
किसी का प्यार 
किसी का खुमार 
किसी की बेचैनी तुम से है
तो किसी के तुम करार .…!

तुम्ही से रंगीनियां 
 रागनियां तुम से
तुम ही तो हो बहार ...!!

ये 'तुम' ही हो न ..
किसी नयन कोर के मोती
या किसी आँख के नूर ..!

'तुम' यहाँ वहां 
न जाने कहाँ कहाँ...
कवि की कल्पना में
कविता के सार में
कहानियों के पात्र में
ग़ज़ल  की तान में...!

सूरज के तेज़ मे
सुलगती शीतल चांदनी में
गर्म लू  या बयार में..!

तुम कल्पना 
तुम सत्य
तुम आस 
तुम विश्वास 
तुम हो तो है सब 
तुम ही आधार ..!

और इधर एक 'मैं' ...
इस विशाल संसार में
उस तुम की परछाई में
खोजती खुद को 
बहते वक़्त में 
क्रमशः विलीन...!!
-शालिनी